मेरी केदारनाथ यात्रा (भाग- 1)
प्यारे मित्रों आप सभी को मैं आज अपनी केदारनाथ यात्रा के बारे मे बतलाता हूँ।
बात उस समय की है जब मैं कक्षा 10 मे प्रवेश कर रहा था तब मेरे दादा और दादी चारों धाम की यात्रा जाने का विचार कर रहे थे,
और मै धीरें धीरें सब कुछ सुनता रहता था, मैंने मन ही मन मे ये सोच लिया था, कि मै भी इनके साथ जाऊगा। 😁😁
और मन ही मन मे बहुत खुश होता रहता था, और जब उनके जाने का दिन आया और फिर क्या मै धीरें से दादी के पास गया और बोला कि दादी यदि कोई 16 वर्ष की उम्र मे तीर्थ करता हैं तो फिर उसको बहुत फायदा होता होगा , फिर दादी बोली और क्या बेटा बहुत फायदा होता है बचपन में भी मैंने कहा तो फिर चालू मैं भी आपके साथ दादी बोली कहां बेटा मैंने कहा केदारनाथ और कहां दादी बोली बेटा वहां तेरा काम नहीं है मैं समझ गया दादी मुझे मना कर कर रही हैं फिर क्या
😢😢😢😢😢 मैं मम्मी के पास गया और रोने लगा मम्मी बोली बेटा क्यों रो रहे हो , मैंने कहा मम्मी मुझे भी दादी के साथ केदारनाथ जाना है मम्मी बोली पागल हो क्या बाद में जाना हमारे साथ मेरे कहां नहीं मुझे तो अभी जाना है, घर के सभी लोग बोलने लगे कि शिवम रो क्यों रहा है मम्मी ने कहा यह बोल रहा है मुझे केदारनाथ जाना है सब ने मुझे मजाक में ले लिया
लास्ट में जाते जाते जब मैं बहुत तेज रोने लगा तो घर वालों ने बोला कि चले तो जाने दो उसको भी क्या होता है
😃😃😃😃😃
फिर क्या मैं खुश हो गया।
और आखिरकार में उनके साथ चार धाम की यात्रा के लिए ट्रेन में निकल ही गया।
लास्ट में जाते जाते जब मैं बहुत तेज रोने लगा तो घर वालों ने बोला कि चले तो जाने दो उसको भी क्या होता है
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फिर क्या मैं खुश हो गया।
और आखिरकार में उनके साथ चार धाम की यात्रा के लिए ट्रेन में निकल ही गया।
वहाँ जो मेरे द्वारा मस्ती हुई बह में आपको अगले भाग मे बताता हूं।


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